सौर परिवार के महत्वपूर्ण ग्रह पृथ्वी के जलभाग, स्थल भाग और नम-भाग पर सर्वत्र वायु विद्यमान है। पृथ्वी पर जल या स्थल लगातार नहीं है, लेकिन वायु इसे पूर्ण रुप से घेरे हुए है। जलचर, स्थलचर और नभरच सभी वायु के प्रभाव से समान रुप से प्रभावित हैं। यह वायु धूल कण, जलवाष्प तथा विभिन्न गैसों का मिश्रण है, जो पृथ्वी के चारों तरफ हजारों किलोमीटर तक व्यास है। पृथ्वी के चारों तरफ फैले वायु के इस आवरण को वायुमंडल कहा जाता है। वायुमंडल पृथ्वी का उतना ही अभिन्न अंग है जितना कि जल और स्थल।
पृथ्वी की सतह से लगभग 10,000 मीटर की ऊँचाई तक, समुद्र में लगभग 8,000 मीटर की गहराई तक और पृथ्वी की सतह से 250 मीटर गहराई तक सम्पूर्ण जैवमंडल वायुमंडल के प्रभाव से प्रभावित है। इस तरह हम देखते हैं कि वायुमंडल गैसों एवं उसमें निलम्बित तरल और ठोस पदार्थों का मोटा अनाच्छादन है जिससे पृथ्वी पूर्ण रुप से आवेष्टित है, इस वायु निर्मित आवरण का घरातल में, भी कुछ गहराई तक प्रवेश है।
वायुमंडल की ऊँचाई के सम्बन्ध में अब तक कोई निश्चित जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी है। आज से लगभग दो सौ वर्ष पहले एडमण्ड हेल ने वायुमंडल की ऊँचाई 75 कि मी०० बतायी थी, जबकि आज रॉकेटों और कृत्रिम उपग्रहों के माध्यम से इसकी ऊँचाई 32 हजार किलोमीटर तक आँकी गयी है। आज जब विज्ञान इतना विकास पर है तब भी हमारे पास कोई भी ऐसा वैज्ञानिक साधन उपलब्ध नहीं है कि वायुमंडल के ऊपरी विस्तार का पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकें। हम अब तक धरातल से मात्र 36 किलोमीटर ऊँचाई तक की ही पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सके हैं, इससे ऊपर की ऊँचाई अनन्त है। फिर भी राडार, वेनगार्ड, रेडियो, साउन्ड, कृत्रिम उपग्रह आदि के माध्यम से असीम वायुमण्डल के ऊपरी विस्तार के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए खोज जारी है।
वायुमण्डल की रचना अनेक गैसों से हुई है, इसके अतिरिक्त इसमें जल वाष्प, धूल कण एवं अति सूक्ष्म जीव भी शामिल हैं। घरातल के समीप वायुमण्डल की नीचली तह में ये जीव अतिसूक्ष्म होने के कारण दिखाई नहीं पड़ते।
गैसें :- वायुमण्डल में लगभग 99.97% भारी गैसें तथा लगभंग .03% हलकी गैसें विद्यमान हैं। भारी गैसें वायुमण्डल की नीचले स्तरों में पायी जाती है तथा हल्की गैसें ऊपरी स्तरों में पृथ्वी से 100 किलोमीटर ऊँचाई तथा ऑक्सीजन और नाइट्रोजन पायी जाती है। नियोन, हिलियम आदि गैसें घरातल से ऊपर असीम ऊँचाइयों तक विद्यमान हैं। वायुमण्डल में नाइट्रोजन की मात्रा 78.088% तथा भार 675.527% है जबकि कार्बनडाईऑक्साइड की मात्रा 0.03% तथा भार 0.0456% है।
बहुत समय तक मानव वायुमण्डल की मात्रा निचली तह के बारे में ही जानकारी रखता था क्योंकि यह निचला भाग ही मानव के लिए बहुत समय तक उपयोगी रहा। वायुमण्डल की ऊपरी तहों के बारे में जानने का प्रयास बीसवीं शताब्दी में प्रारम्भ हुआ क्योंकि रेडियों एवं वायुयान युग के प्रारम्भ होने के साथ ही वायुमण्डल की ऊपरी तहों का ज्ञान भी आवश्यक हो गया। गत